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सीमा व सीमांत

सीमा व सीमांत  सीमाओं व सीमांत का सर्वप्रथम अध्ययन रेटजेल ने किया था. रेटजेल ने सीमाओं की तुलना किसी जीव की त्वचा से की अर्थात् किसी राज्य या प्रदेश की सुरक्षा सीमाएँ करती है. सीमाओं का आनुवांशिक वर्गीकरण हॉर्टशोर्न ने किया था। जॉन्श 1945 की पुस्तक "Boundary making A hand Book for Statesman" में सीमाओं के निर्धारण का अध्ययन प्रस्तुत किया गया. सीमा Boundaries  शब्द अग्रेंजी के Bound  से बना है इसका अर्थ बाँधना या सीमित करना होता है. सीमांत- सीमांत शब्द का अर्थ एक निश्चित रेखा के लिए नही होता है, आर्थात् एक विशेष क्षेत्र के लिए प्रयुक्त किया जाता है इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे अग्र प्रदेश तटस्थ क्षेत्र मानव रक्षित क्षेत्र, सक्रांति प्रदेश आदि.                               सीमा व सीमांत में अतंर        सीमा                   सीमांत 1. ये रेखात्मक प्रकृति की होती है-           1....

राजनिति भूगोल Political Geography

राजनिति भूगोल Political Geography राजनीति भूगोल का विकास- सन 1859 में चार्ल्स डार्विन ने प्रजातियों के उदभव (Evolution of Species) का सिद्धांत प्रतिपादित किया था. हरबर्ट स्पेन्सर ने सामाजिक डार्विनवाद संकल्पना प्रस्तुत की. उपरोक्त दोनो संकल्पनानाओं से प्रेरित होकर रेटजेल ने जैविक राज्य की सकल्पना प्रस्तुत की.रेटजेल ने ही  लेबन्सरोम शरण स्थल की संकल्पना प्रस्तुत की  भूगोल में राजनीतिक भूगोल की वास्तविक शुरुआत फ्रेडरिक रेटजेल (1844-1904)  के कार्यकाल में हुई. सन 1896 में रेटजेल ने एक पत्र राज्यों के क्षेत्रीय विकास के नियम- राजनैतिक भूगोल के वैज्ञानिक अध्ययन में योगदान लिखा  1897 में रेटजेल की राजनैतिक भूगोल पुस्तक आई जिसका शीर्षक  दी लॉज ऑफ दी स्पॉशियल ग्रोथ ऑफ स्टेट्स था. सन 1904 में मैकिन्डर ने इतिहास की भौगोलिक घुरी "Geographical Pivat of History " नामक शोध पत्र पस्तुत किया. सन 1915 फेयर ग्रीव ने दबाव क्षेत्र संकल्पना क्रश जोन संकल्पना प्रस्तुत की.फेयर ग्रीव की पुस्तक  Geography and Word Power सन 1919 में मैकिन्डर ने अपनी पुस्त...

प्रमुख भौगोलिक विचारधाराएँ Important geographical thoughts

प्रमुख भौगोलिक विचारधाराएँ (1) द्वैतवाद (Dualism) द्वैतवाद का अर्थ है, एक दूसरे की पुरकता को समझना तथा उनके अनन्योनय संबंधों का विश्लेषण जिनमें कभी प्रकृति श्रेष्ठ नजर आती है तो कभी मानव। प्रमुख द्वैतवाद- भौतिक भूगोल बनाम मानव भूगोल  निश्चयवाद बनाम प्रादेशिक संभववाद क्रमबद्ध भूगोल बनाम प्र्रादेशिक भूगोल  सामान्य भूगोल बनाम विशिष्ट भूगोल (2) निश्चयवाद का उदगम एवं विकास- सर्वप्रथम नीग्रो रोमनकाल में उदय हुआ जिसमें अरस्तु मुख्य समर्थक थे तथा भूगोल के पिता हिकेटियस भूगोल शब्द के जनक इरेटोस्थनीज एवं हिप्पाकिस जैसे विद्वान रहे है। इनका नीतिवाद भौगोलिक नीतिवाद है जिसमें मानव को प्रकृति का दास माना गया है प्रकृति को सर्वोपरि तथा मानव की आर्थिक सास्कृतिक परिदृश्य को प्रकृति का उत्पादय माना है। पूर्व आधुनिककाल में नीतिवाद का स्वरुप बदला जिसमें हम्बोल्ट एंव रिटर ने पारिस्थितिकी नीतिवाद को संकल्पित किया जिसमे मानव एंव प्रकृतिक को अन्नयोश्रित बताया तथा प्रकृति को मानव से अलग तथा प्रकृतिक से स्वतंत्र कोई स्वेच्छिक इकाई नही है। चार्ल्स डार्विन वैज्ञानिक निश्चयवाद के ...

पुन र्जागरण काल Renaissance Period

 पुन र्जागरण काल Renaissance Period तेरहवी से सत्रहवीं शताब्दी (1250 से 1750 ईस्वी) के काल को पुनर्जागरण काल माना जाता है। अंधकार युग के बाद भूगोल में पुनर्जागरण काल वह दौर आया जब भौगोलिक खोज, अन्वेषण फिर से प्रारम्भ हुये।  पुनर्जागरण काल के पहले का दौर का समय जिसे अंधकार युग कहा गया, यह काल तीसरी से बारहवीं शताब्दी 300 से 1200 ईस्वी तक रहा। अंधकार युग में लगभग सभी प्रकार की खोजे, शोध कार्य बंद हो गये, इनका स्थान धार्मिक आडम्बरों ने ले लिया। इसाई धर्मावलंबी देशों, विशेषकर यूरोपीय देशों में इसका विशेष प्रभाव नजर आया, ईसाई पादरियों ने एक तरिके से धर्म की सत्ता स्थापित हो गई। इसको एक उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है। यदि कोई भी व्यक्ति किसी तरह का कोई भी अपराध कर दे तो वह चर्च में जाकर पादरी को पैसे देकर क्षमापत्र खरीद लेता है तो उसके सारे पाप धुल जायेगे। आदि ऐसे अनेक धार्मिक बुराईया समाज व राष्ट्र में चारों और व्याप्त हो गई। मुल रुप से अंधकार युग का मुल कारण रोमन साम्राज्य के पत्तन को माना जाता है  पुनर्जागरण काल ही वह काल था जब भौगोलिक खोजे धीरे-धीरे फिर से प्रारम्...

भारत में भूगोल का विकास Development of Geography in India

भारत में भूगोल का विकास (Development of Geography in India) भारत में अभी भी भूगोल का पूर्ण विकास नही हुआ, 18वी शताब्दी के अन्तिम दौर तक भूगोल विषय के बारे में बहुत कम जानकारियॉ उपलब्ध थी, तथा जो भी जानकारीया उपलब्ध होती थी उनका अध्ययन भारत की एकमात्र सस्थान सर्वे ऑफ इडिंया में किया जाता जिसकी स्थापना भौगोलिक कार्यो हेतु 1767 में की गई यह सस्थान उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित है। 19वी शताब्दी के आधे दौर के गुजर जाने बाद भी भारत में भूगोल के क्षेत्र कोई खास विकास नही हो पाया इसका प्रमुख कारण यह माना जाता है, भारत में भौगोलिक खोजों, अनवेषणों आदि का प्रयाप्त अभाव था तथा उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्कुलों ऐसे शिक्षको का अभाव था जिनका भूगोल विषय के ज्ञान का अभाव था। इस दौर तक भूगोल का अध्ययन केवल इतिहास राजनीति, समाजशास्त्र आदि विषयों के साथ भूगोल को पढ़ाया जाता है। कहने का मतलब यही यह की इस समय तक भूगोल को एक स्वतंत्र विषय के रुप में नही पढ़ाया जाता था। भारत में भूगोल के अध्ययन के वास्तविक दौर की शुरुआत भारत की आजादी के बाद शुरु हुआ, जब आस्ट्रेलिया के एक भूगोलवेत्त...

ब्रिटिश भूगोलवेत्ता British geographers

           ब्रिटिश भौगोलिक विचारधाराएँ 16वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ब्रिटेन में भौगोलिक खोजों में धीरे-धीरे तेजी आने लगी, तथा सत्रहवी शताब्दी से  अठारहवी शताब्दी में अपने चर्म अवस्था पर थी। उन्नसवीं शताब्दी में ब्रिटेन में भूगोल को वैज्ञानिक स्वरुप प्राप्त हुआ। साल 1830 में ब्रिटेन में रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी की स्थापना के साथ धीर-धीरे वैज्ञानिक कार्य प्रारम्भ होने लगे। मैकोनोची को रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी का प्रथम सचिव नियुक्त किया गया। (1)  हालफोर्ड जॉन मेकिण्डर (H.J Mackinder1861-1947) ब्रिटिश में भूगोल सम्प्रदाय का संस्थापक मेकिण्डर ने रेटजेल की पुस्तक एन्थ्रोफोज्योग्राफी का अनुसरण करते हुए कहा की मानव भूगोलवेत्ता ही पूर्ण भूगोलवेत्ता है। प्रमुख पुस्तक-    1. ब्रिटेन व ब्रिटेन सागर (Britain and British Seas 1902)    2. इतिहास की भौगोलिक धुरी (Geographical Pivot of History 1904)    इस पुस्तक में मैकेण्डर ने कहा कि वर्तमान समय में सभी युद्ध का समापन हो गया है एंव भविष्य में थल शक्ति ही नि...

अमेरिकन भूगोलवेत्ता American geographers

          अमेरिकन भौगोलिक विचारधाराएँ (1) जॉर्ज परकिन्स मार्श (1801-1882) अमेरिका में स्वतंत्र विचारधारा का प्रथम भूगोलवेत्ता मार्श ने सर्वप्रथम जर्मनी की निश्चयवादी विचारधारा का विरोध किया तथा उसने बताया की प्राकृतिक वातावरण पर मानव का प्रभाव पड़ता है। मार्श ने ही सर्वप्रथम सरक्षण विचारधारा को प्रस्तुत किया। प्रमुख पुस्तके-    1. मानव एवं प्रकृति (2) अर्नोल्ड हैनरी गायोट (1807-1884) प्रमुख पुस्तक-पृथ्वी तथा मानव अमेरिका में भूगोल का प्रथम प्रोफेसर रहे। उदेश्यवादी, ईश्वरवादी विचारधारा का समर्थक तथा रिटर के समान ही इसकी भी दार्शनिक प्रकृति थी सन 1890 में अमेरिकन ज्योगाफीकल सोसायटी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। (3) विलियम मोरिस डेविस (1850-1934) स्थालकृति विज्ञान का जनक पिता कहा जाता है। 1904 में अमेरिकन भूगोलवेत्ता संघ की स्थापना की। नियतिवादी विचाराधारा का समर्थक 1899 में अपरदन चक्र की संकल्पना प्रस्तुत की। डेविस मानव भूगोलवेत्ताओं के प्रबल आलोचक थे उनके अनुसार मानव भूगोलवेत्ता पूर्ण भूगोलवेत्ता नही है। प्रमुख पुस्तक- ...