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Showing posts from October, 2019

study websites for students

study websites for students वर्तमान  में आनलाइन एजुकेशन का स्तर बढ़ता ही जा रहा है  घर बैठे दुनिया भर की स्कुलों, यूनिवर्सिटी का पाठयक्रम घर बैठे मिल जाता है और विडियो कलास माध्यम से अच्छे से अध्ययन करवाया जाता है सकते है साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले अध्यापको के द्वारा अपनी विषय वस्तु संबंधित सोल्युशन भी करवा सकते है. इंटरनेट पर कुछ ऐसी वेबसाइट है जो आॅनलाइन स्टेडी करने वाले विद्यार्थीयों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है. coursera यदि आप घर बैठे आनलाइन पढ़ना चाहते हो तो यह वेबसाइड आपके लिए है इस वेबसाइड पर विश्व की बड़ी यूनिवर्सीटी के के प्रशिक्षको द्वारा अध्यापन करवाया जाता है, यहा आप अपनी सुविधा अनुसार कोई भी पाठयक्रम चुन सकते है तथा उससे संबंधित अध्ययन सामग्री नोट्स विडियों क्लास आदि सुविधाएं उपलब्ध है, साथ ही पाठयक्रम पुरा होने पर आपको एक प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। इस पर हर रोज कुछ न कुछ नये सीख सकते है.  https://www.coursera.org Best Logo Website shiksha इस वेबसाईट पर चालीस हजार से अधिक पाठयक्रम मौजुद है इसका मतलब ये है की यहाँ पर स्कुली स्तर स...

Best Logo Website

बनाईये एक शानदार प्रोफेशनल लॉगों जब हम अपना खुद का स्टार्ट अप शुरु करते है अपना व्यवसाय शुरु करते है चाहे वह कोई कंपनी हो या फिर कोई ऑनलाइन प्लेटफोर्म के जरिये अपना व्यक्तिगत बिजनेस चालू करते है तो हम एक लॉगो के बारे में विचार जरुर करते है लॉगो भी ऐसा जो अपने ब्राड को उचा रख सके अर्थात् उस लॉगो में अपने स्टार्टअप की झलक स्पष्ट दिखाई दे जो आपके व्यक्तित्व की छवी को उभार सके तथा जिस कार्य के लिए लॉगो बनाया है उसकी पहुच चारो और फैलाई जा सके यहाँ यह भी ध्यान देना जरुरी है की लॉगो बहुत ज्यादा प्रोफेशनल होना चाहिए जो दिखने में काफी ज्यादा आकर्षक होना चाहिए क्योकि लॉगो जितना ज्यादा अट्रैक्टिव होगा लोगो का ध्यान उतना ही आपकी और आकर्षित होगा. fiverr : एक ऐसी वेबसाइट जहाँ पर लॉगो बनाने से लेकर ग्राफिक डिजाइन, डिजिटल मार्केटिग, राइटिंग एंड ट्रांसलेशन, विडियों एनिमिनेशन, म्युजिक ऑडियों, प्रोग्रामिंग एंड टीच, बिजनेस, लाइफस्टाइल ऐसे विकल्प मौजुद है. जैसे ही आप मेन्युबार के ग्राफिक डिजाइन पर क्लिक करोगे तो आपको ग्राफिक डिजाइन से संबंधित सारे ऑप्शन मिल जायेगे जैसे लॉगो डिजाइन, गेम डिजाइन...

सीमा व सीमांत

सीमा व सीमांत  सीमाओं व सीमांत का सर्वप्रथम अध्ययन रेटजेल ने किया था. रेटजेल ने सीमाओं की तुलना किसी जीव की त्वचा से की अर्थात् किसी राज्य या प्रदेश की सुरक्षा सीमाएँ करती है. सीमाओं का आनुवांशिक वर्गीकरण हॉर्टशोर्न ने किया था। जॉन्श 1945 की पुस्तक "Boundary making A hand Book for Statesman" में सीमाओं के निर्धारण का अध्ययन प्रस्तुत किया गया. सीमा Boundaries  शब्द अग्रेंजी के Bound  से बना है इसका अर्थ बाँधना या सीमित करना होता है. सीमांत- सीमांत शब्द का अर्थ एक निश्चित रेखा के लिए नही होता है, आर्थात् एक विशेष क्षेत्र के लिए प्रयुक्त किया जाता है इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे अग्र प्रदेश तटस्थ क्षेत्र मानव रक्षित क्षेत्र, सक्रांति प्रदेश आदि.                               सीमा व सीमांत में अतंर        सीमा                   सीमांत 1. ये रेखात्मक प्रकृति की होती है-           1....

राजनिति भूगोल Political Geography

राजनिति भूगोल Political Geography राजनीति भूगोल का विकास- सन 1859 में चार्ल्स डार्विन ने प्रजातियों के उदभव (Evolution of Species) का सिद्धांत प्रतिपादित किया था. हरबर्ट स्पेन्सर ने सामाजिक डार्विनवाद संकल्पना प्रस्तुत की. उपरोक्त दोनो संकल्पनानाओं से प्रेरित होकर रेटजेल ने जैविक राज्य की सकल्पना प्रस्तुत की.रेटजेल ने ही  लेबन्सरोम शरण स्थल की संकल्पना प्रस्तुत की  भूगोल में राजनीतिक भूगोल की वास्तविक शुरुआत फ्रेडरिक रेटजेल (1844-1904)  के कार्यकाल में हुई. सन 1896 में रेटजेल ने एक पत्र राज्यों के क्षेत्रीय विकास के नियम- राजनैतिक भूगोल के वैज्ञानिक अध्ययन में योगदान लिखा  1897 में रेटजेल की राजनैतिक भूगोल पुस्तक आई जिसका शीर्षक  दी लॉज ऑफ दी स्पॉशियल ग्रोथ ऑफ स्टेट्स था. सन 1904 में मैकिन्डर ने इतिहास की भौगोलिक घुरी "Geographical Pivat of History " नामक शोध पत्र पस्तुत किया. सन 1915 फेयर ग्रीव ने दबाव क्षेत्र संकल्पना क्रश जोन संकल्पना प्रस्तुत की.फेयर ग्रीव की पुस्तक  Geography and Word Power सन 1919 में मैकिन्डर ने अपनी पुस्त...

प्रमुख भौगोलिक विचारधाराएँ Important geographical thoughts

प्रमुख भौगोलिक विचारधाराएँ (1) द्वैतवाद (Dualism) द्वैतवाद का अर्थ है, एक दूसरे की पुरकता को समझना तथा उनके अनन्योनय संबंधों का विश्लेषण जिनमें कभी प्रकृति श्रेष्ठ नजर आती है तो कभी मानव। प्रमुख द्वैतवाद- भौतिक भूगोल बनाम मानव भूगोल  निश्चयवाद बनाम प्रादेशिक संभववाद क्रमबद्ध भूगोल बनाम प्र्रादेशिक भूगोल  सामान्य भूगोल बनाम विशिष्ट भूगोल (2) निश्चयवाद का उदगम एवं विकास- सर्वप्रथम नीग्रो रोमनकाल में उदय हुआ जिसमें अरस्तु मुख्य समर्थक थे तथा भूगोल के पिता हिकेटियस भूगोल शब्द के जनक इरेटोस्थनीज एवं हिप्पाकिस जैसे विद्वान रहे है। इनका नीतिवाद भौगोलिक नीतिवाद है जिसमें मानव को प्रकृति का दास माना गया है प्रकृति को सर्वोपरि तथा मानव की आर्थिक सास्कृतिक परिदृश्य को प्रकृति का उत्पादय माना है। पूर्व आधुनिककाल में नीतिवाद का स्वरुप बदला जिसमें हम्बोल्ट एंव रिटर ने पारिस्थितिकी नीतिवाद को संकल्पित किया जिसमे मानव एंव प्रकृतिक को अन्नयोश्रित बताया तथा प्रकृति को मानव से अलग तथा प्रकृतिक से स्वतंत्र कोई स्वेच्छिक इकाई नही है। चार्ल्स डार्विन वैज्ञानिक निश्चयवाद के ...

पुन र्जागरण काल Renaissance Period

 पुन र्जागरण काल Renaissance Period तेरहवी से सत्रहवीं शताब्दी (1250 से 1750 ईस्वी) के काल को पुनर्जागरण काल माना जाता है। अंधकार युग के बाद भूगोल में पुनर्जागरण काल वह दौर आया जब भौगोलिक खोज, अन्वेषण फिर से प्रारम्भ हुये।  पुनर्जागरण काल के पहले का दौर का समय जिसे अंधकार युग कहा गया, यह काल तीसरी से बारहवीं शताब्दी 300 से 1200 ईस्वी तक रहा। अंधकार युग में लगभग सभी प्रकार की खोजे, शोध कार्य बंद हो गये, इनका स्थान धार्मिक आडम्बरों ने ले लिया। इसाई धर्मावलंबी देशों, विशेषकर यूरोपीय देशों में इसका विशेष प्रभाव नजर आया, ईसाई पादरियों ने एक तरिके से धर्म की सत्ता स्थापित हो गई। इसको एक उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है। यदि कोई भी व्यक्ति किसी तरह का कोई भी अपराध कर दे तो वह चर्च में जाकर पादरी को पैसे देकर क्षमापत्र खरीद लेता है तो उसके सारे पाप धुल जायेगे। आदि ऐसे अनेक धार्मिक बुराईया समाज व राष्ट्र में चारों और व्याप्त हो गई। मुल रुप से अंधकार युग का मुल कारण रोमन साम्राज्य के पत्तन को माना जाता है  पुनर्जागरण काल ही वह काल था जब भौगोलिक खोजे धीरे-धीरे फिर से प्रारम्...

भारत में भूगोल का विकास Development of Geography in India

भारत में भूगोल का विकास (Development of Geography in India) भारत में अभी भी भूगोल का पूर्ण विकास नही हुआ, 18वी शताब्दी के अन्तिम दौर तक भूगोल विषय के बारे में बहुत कम जानकारियॉ उपलब्ध थी, तथा जो भी जानकारीया उपलब्ध होती थी उनका अध्ययन भारत की एकमात्र सस्थान सर्वे ऑफ इडिंया में किया जाता जिसकी स्थापना भौगोलिक कार्यो हेतु 1767 में की गई यह सस्थान उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित है। 19वी शताब्दी के आधे दौर के गुजर जाने बाद भी भारत में भूगोल के क्षेत्र कोई खास विकास नही हो पाया इसका प्रमुख कारण यह माना जाता है, भारत में भौगोलिक खोजों, अनवेषणों आदि का प्रयाप्त अभाव था तथा उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्कुलों ऐसे शिक्षको का अभाव था जिनका भूगोल विषय के ज्ञान का अभाव था। इस दौर तक भूगोल का अध्ययन केवल इतिहास राजनीति, समाजशास्त्र आदि विषयों के साथ भूगोल को पढ़ाया जाता है। कहने का मतलब यही यह की इस समय तक भूगोल को एक स्वतंत्र विषय के रुप में नही पढ़ाया जाता था। भारत में भूगोल के अध्ययन के वास्तविक दौर की शुरुआत भारत की आजादी के बाद शुरु हुआ, जब आस्ट्रेलिया के एक भूगोलवेत्त...