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Showing posts from May, 2026

भूगोल में मात्रात्मक क्रांति तथा इसके गुण और दोष The Quantitative Revolution in Geography: Its Merits and Demerits:

 भूगोल में मात्रात्मक क्रांति मात्रात्मक क्रांति का अर्थ है भौगोलिक विषयों में गणितीय एंव साख्यिकीय विधियों का उपयोग का माॅडल एंव सिद्धांत का निर्माण जिससे इन विषयों में वस्तुनिष्ठता एंव वैज्ञानिकता का विकास किया जा सके। भूगोलवेत्ताओं का मानना था की भूगोल में गणितीय सुत्रों माॅडलों तथा सांख्यिकी विधियों का प्रयोग करके भौगोलिक ज्ञान अन्वेष्ण सिद्धांतो का निरक्षण करके और भी सुदृढ़ किया जा सकता है।  मात्रात्मक क्रांति के प्रेरणा शैफर्ड के क्रमबद्ध भूगोल के समर्थन से मिली। मात्रात्मक क्रांति में निम्न विधियों का प्रयोग होता है। गणितीय विधि  साख्यिकीय विधि भौतिक विधि साइबर मेटिक्स- जिसमें तंत्र विश्लेषण एंव नियामक तंत्रों का अध्ययन किया जाता है। मात्रात्मक क्रांति के चरण प्रथम चरण 1818 से 1915 इस दौरान नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्रीय पर आधारित माॅडल पर माॅडल बने जैसे-वाॅन थ्यूनेन का माॅडल 1826 वेबर का औद्योगिक अवस्थिति सिद्धांत 1909 आदि। द्वितीय चरण 1915-1945 इस दौरान मुख्यतः बस्ती भूगोल एंव आर्थिक भूगोल के क्षेत्र में माॅडल निर्माण में जैसे- प्राथमिक नगर संकल्पना, कोटि आकार नियम्...

जेट स्ट्रीम क्या है जेट धाराओं की उत्पत्ति प्रकार जेट स्ट्रीम के जलवायु प्रभाव What is a Jet Stream? Origin, Types, and Climatic Effects of Jet Stream

  जेट स्ट्रीम क्या है जेट धाराओं की उत्पत्ति प्रकार जेट स्ट्रीम के जलवायु प्रभाव जेट स्ट्रीम क्षोभसीमा (troposphere) के निकट चारो और वायु का सर्फिलाकार प्रवाह है, जो पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है। जिसको जेट स्ट्रीम कहा जाता है। जिसकी  औसत लम्बाई 1600 किमी से 390 किमी, औसत धरातल से ऊँचाई 8 से 12 किमी औसत गहराई 1 से 2 किमी., चौड़ाई 80 से 150 किमी. है।  विभिन्न जेट धाराओं की उत्पत्ति के विभिन्न कारक- 1 उपोष्ण कटिबंधीय जेट स्ट्रीम- इस जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति क्षोभसीमा के निकट 30° से 35° अक्षांशों के ऊपर प्रति  पछुवा पवनों के अभिसरण (पास आना)  से होती है ये सपूंर्ण ग्लोब पर सर्वाधिक स्थाई एवं सबसे लंबी जेट स्ट्रीम है जो कि लबंवत वर्ष भर नियत बनी होती है, लेकिन सूर्य के उत्तरायण व दक्षिणायन के कारण इनमें उत्तर व दक्षिण की और विस्थापन देखा जाता है इसी कारण शीतकाल में जेट स्ट्रीम पामीर की गांठ से टकराकर इसका एक भाग हिमालय के दक्षिण की और प्रवाहित होता है। चूँकी ये जेट स्ट्रीम अपने प्रवाह के कारण भूमध्य सागर से आर्द्रता ग्रहण करती है जिससे भारत के...

पवन पवनों का वर्गीकरण पवनों की उत्पत्ति के कारण

  पवन, पवनों का वर्गीकरण  पवनों की उत्पत्ति के कारण वायु के क्षैतिज संचरण को पवन के समान्तर तथा समदाब रेखाओं के लम्बवत् संचरण करती है। वायु के उध्र्वाधर संचरण को वायु धारा कहते है। पवनों की उत्पत्ति के कारण 1 दाब प्रवणता बल-   ये समदाब रेखाओं के लंबवत एवं पवन के वेग समानुपाती होता है। यदि समदाब रेखाएँ सकीर्ण है तथा दाब प्रवणता उच्च होता है। 2 कोरियोलिस बल- घूर्णन करती हुई पृथ्वी पर कोई भी गतिशील वस्तु अथवा पवन अपनी सरल रेखा में गति न कर उत्तरी गोलार्द्ध में अपने पथ से दाई और तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपने पथ से बाई और विक्षेपित हो जाती है। इस विक्षेपण का सर्वप्रथम कोरियोलिस नामक वैज्ञानिक ने पता लगाया इसे कोरियालिस बल  कहते है। कोरियालिस बल विषुवत रेखा पर शून्य एवं ध्रुवों पर अधिकतम होता है। कोरियोलिस बल के कारण कारण ही चक्रवात् एवं प्रतिचक्रवात जैसी दशाएँ  उत्पन्न होती है। पवन वेग जितना अधिक कोरियोलिस बल उतना ही प्रभावी होगा। पृथ्वी की घुर्णन गति सर्वाधिक 0° विषुवत रेखा पर कम ध्रुर्वो पर होती है। घर्षण बल- कोरियोलिस बल दाब प्रवणता बल का विरोधी है । प्राथमिक सं...

पृथ्वी की प्रमुख वायुदाब पेटियाँ : प्रकार, वितरण एवं प्रभाव

 पृथ्वी की प्रमुख वायुदाब पेटियाँ : प्रकार, वितरण एवं प्रभाव वायुदाब पेटियाँ (Air Pressure) पृथ्वी पर 7 वायुदाब पेटियाँ है जिनको दो भागों में  विभक्त किया गया है। तापजन्य वायुदाब पेटी, गतिजन्य वायुदाब पेटी  (1) तापजन्य वायुदाब पेटी (Thermal pressure belt) -जिसमें भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी, ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी को शामिल किया गया है। (2) गतिजन्य वायुदाब पेटी(Dynamically induced pressure belts)- जिसमें उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी तथा उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी को शामिल किया गया है। 1 विषुवत रेखीय निम्नवायुदाब पेटी ये तापजन्य पेटी है जहाँ वर्ष भर उच्च तापमान पाया जाता है है जिससे निम्नदाब की स्थिति रहती है इसका विस्तार 5 डिग्री अक्षांशों के दोनों और है। अत्यधिक तापमान के कारण वायु में संवहन की क्रिया से रोज 2-4 pm कपासी वर्षक मेघों से वर्षा होती है।  ITCZ Inter Tropical Convergence Zone  अंतरा उष्ण कटिबधीय क्षेेत्र मुख्य रुप से विषुवत रेखीय निम्नदाब पेटी के समांतर स्थित होती है लेकिन सूर्य के उत्तरायण एवं दक्षिणायन तथा महाद्वीपीय व महासागरीय स्थ...