भूगोल में मात्रात्मक क्रांति तथा इसके गुण और दोष The Quantitative Revolution in Geography: Its Merits and Demerits:
भूगोल में मात्रात्मक क्रांति मात्रात्मक क्रांति का अर्थ है भौगोलिक विषयों में गणितीय एंव साख्यिकीय विधियों का उपयोग का माॅडल एंव सिद्धांत का निर्माण जिससे इन विषयों में वस्तुनिष्ठता एंव वैज्ञानिकता का विकास किया जा सके। भूगोलवेत्ताओं का मानना था की भूगोल में गणितीय सुत्रों माॅडलों तथा सांख्यिकी विधियों का प्रयोग करके भौगोलिक ज्ञान अन्वेष्ण सिद्धांतो का निरक्षण करके और भी सुदृढ़ किया जा सकता है। मात्रात्मक क्रांति के प्रेरणा शैफर्ड के क्रमबद्ध भूगोल के समर्थन से मिली। मात्रात्मक क्रांति में निम्न विधियों का प्रयोग होता है। गणितीय विधि साख्यिकीय विधि भौतिक विधि साइबर मेटिक्स- जिसमें तंत्र विश्लेषण एंव नियामक तंत्रों का अध्ययन किया जाता है। मात्रात्मक क्रांति के चरण प्रथम चरण 1818 से 1915 इस दौरान नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्रीय पर आधारित माॅडल पर माॅडल बने जैसे-वाॅन थ्यूनेन का माॅडल 1826 वेबर का औद्योगिक अवस्थिति सिद्धांत 1909 आदि। द्वितीय चरण 1915-1945 इस दौरान मुख्यतः बस्ती भूगोल एंव आर्थिक भूगोल के क्षेत्र में माॅडल निर्माण में जैसे- प्राथमिक नगर संकल्पना, कोटि आकार नियम्...