Sunday, May 24, 2026

भूगोल में मात्रात्मक क्रांति तथा इसके गुण और दोष The Quantitative Revolution in Geography: Its Merits and Demerits:

 भूगोल में मात्रात्मक क्रांति

मात्रात्मक क्रांति का अर्थ है भौगोलिक विषयों में गणितीय एंव साख्यिकीय विधियों का उपयोग का माॅडल एंव सिद्धांत का निर्माण जिससे इन विषयों में वस्तुनिष्ठता एंव वैज्ञानिकता का विकास किया जा सके। भूगोलवेत्ताओं का मानना था की भूगोल में गणितीय सुत्रों माॅडलों तथा सांख्यिकी विधियों का प्रयोग करके भौगोलिक ज्ञान अन्वेष्ण सिद्धांतो का निरक्षण करके और भी सुदृढ़ किया जा सकता है। 

मात्रात्मक क्रांति के प्रेरणा शैफर्ड के क्रमबद्ध भूगोल के समर्थन से मिली।

मात्रात्मक क्रांति में निम्न विधियों का प्रयोग होता है।

  1. गणितीय विधि
  2.  साख्यिकीय विधि
  3. भौतिक विधि
  4. साइबर मेटिक्स- जिसमें तंत्र विश्लेषण एंव नियामक तंत्रों का अध्ययन किया जाता है।

मात्रात्मक क्रांति के चरण

प्रथम चरण 1818 से 1915 इस दौरान नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्रीय पर आधारित माॅडल पर माॅडल बने जैसे-वाॅन थ्यूनेन का माॅडल 1826

वेबर का औद्योगिक अवस्थिति सिद्धांत 1909 आदि।

द्वितीय चरण 1915-1945 इस दौरान मुख्यतः बस्ती भूगोल एंव आर्थिक भूगोल के क्षेत्र में माॅडल निर्माण में जैसे- प्राथमिक नगर संकल्पना, कोटि आकार नियम्।

तृतीय चरण 1945-1976 ये अदभूत काल है जिसमें सम्पूर्ण भूगोल में माॅडल एंव सिद्धांत का निर्माण प्रारम्भ किया जिन्हे 1955 में बर्टन ने मात्रात्मक क्रांति की संज्ञा दी बर्टन ने मात्रात्मक क्रांति को आगे बढ़ते हुए जर्नल ऑफ कनेडियन ज्याॅफर में एक शोध पत्र (The Quantitative Revolution and Theoretical Geography) प्रकाशित किया  इस दौरान स्टाप्प ने कृषि भूगोेल पीटर हेगेट ने अवस्थितिकी विश्लेषण, चोरली एंव बैली ने तंत्र विश्लेषण में मात्रात्मक क्रांति को आधार बनाया।  स्पेट ने सन 1960 में अपनी पुस्तक (Quantity and Quality in Geography) में लिखा कि भूगोल में गणितिय साख्यियिकी विधियों, सुत्रों, माॅडलों का महत्व आवश्यक है। परंतु 1978 तक यह सिद्ध हो चुका था कि मानव भूगोल में बनने वाले सिद्धांत अथवा माॅडल आशिंक सत्यता को ही दर्शाते  है एंव इस दौरान नील हार्वे ने लिखा की मात्रात्मक क्रांति अपनी समयावधि पूर्ण कर चूका है।

मात्रात्मक क्रांति के गुण 

  1. भूगोल में वैज्ञानिकता का प्रवेश ।
  2. विषय वस्तु से वस्तुनिष्ठता की और।
  3. भूगोल शोध के रुप में प्रतिष्ठित हुआ तथा एक नये अन्वेषण के रुप में प्रवेश हुआ।
  4. भूगोल में गणितीय विधियों के द्वारा माॅडलों का निर्माण गणनात्मक कार्य सिद्धांतों का निर्माण करना सम्भव हो पाया।

मात्रात्मक क्रांति के दोष

1 इसमें मानव एक रोबोट हो गया। अर्थात् मानव भावना शून्य हो गया। जब की यह ये संभव नही है। 
2 मात्रात्मक क्रांति में बनने वाले माॅडल एंव सिद्धांत आंषिक सत्यता को प्रदर्षित करते है, पूर्ण सत्यता नही।
3 भूगोल के सभी कार्यो सिद्धांतों की व्याख्या गणितीय विधि द्वारा संभव नही है। 
4 मानव तथा पर्यावरण के बीच आन्तरिक संबंधों की व्याख्या करना मात्रात्मक विधि  द्वारा कतई सम्भव नही है।

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