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Showing posts from September, 2019

ब्रिटिश भूगोलवेत्ता British geographers

           ब्रिटिश भौगोलिक विचारधाराएँ 16वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ब्रिटेन में भौगोलिक खोजों में धीरे-धीरे तेजी आने लगी, तथा सत्रहवी शताब्दी से  अठारहवी शताब्दी में अपने चर्म अवस्था पर थी। उन्नसवीं शताब्दी में ब्रिटेन में भूगोल को वैज्ञानिक स्वरुप प्राप्त हुआ। साल 1830 में ब्रिटेन में रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी की स्थापना के साथ धीर-धीरे वैज्ञानिक कार्य प्रारम्भ होने लगे। मैकोनोची को रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी का प्रथम सचिव नियुक्त किया गया। (1)  हालफोर्ड जॉन मेकिण्डर (H.J Mackinder1861-1947) ब्रिटिश में भूगोल सम्प्रदाय का संस्थापक मेकिण्डर ने रेटजेल की पुस्तक एन्थ्रोफोज्योग्राफी का अनुसरण करते हुए कहा की मानव भूगोलवेत्ता ही पूर्ण भूगोलवेत्ता है। प्रमुख पुस्तक-    1. ब्रिटेन व ब्रिटेन सागर (Britain and British Seas 1902)    2. इतिहास की भौगोलिक धुरी (Geographical Pivot of History 1904)    इस पुस्तक में मैकेण्डर ने कहा कि वर्तमान समय में सभी युद्ध का समापन हो गया है एंव भविष्य में थल शक्ति ही नि...

अमेरिकन भूगोलवेत्ता American geographers

          अमेरिकन भौगोलिक विचारधाराएँ (1) जॉर्ज परकिन्स मार्श (1801-1882) अमेरिका में स्वतंत्र विचारधारा का प्रथम भूगोलवेत्ता मार्श ने सर्वप्रथम जर्मनी की निश्चयवादी विचारधारा का विरोध किया तथा उसने बताया की प्राकृतिक वातावरण पर मानव का प्रभाव पड़ता है। मार्श ने ही सर्वप्रथम सरक्षण विचारधारा को प्रस्तुत किया। प्रमुख पुस्तके-    1. मानव एवं प्रकृति (2) अर्नोल्ड हैनरी गायोट (1807-1884) प्रमुख पुस्तक-पृथ्वी तथा मानव अमेरिका में भूगोल का प्रथम प्रोफेसर रहे। उदेश्यवादी, ईश्वरवादी विचारधारा का समर्थक तथा रिटर के समान ही इसकी भी दार्शनिक प्रकृति थी सन 1890 में अमेरिकन ज्योगाफीकल सोसायटी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। (3) विलियम मोरिस डेविस (1850-1934) स्थालकृति विज्ञान का जनक पिता कहा जाता है। 1904 में अमेरिकन भूगोलवेत्ता संघ की स्थापना की। नियतिवादी विचाराधारा का समर्थक 1899 में अपरदन चक्र की संकल्पना प्रस्तुत की। डेविस मानव भूगोलवेत्ताओं के प्रबल आलोचक थे उनके अनुसार मानव भूगोलवेत्ता पूर्ण भूगोलवेत्ता नही है। प्रमुख पुस्तक- ...

फ्रांस के भूगोलवेत्ता french geographers

            फ्रांंसिसी भौगोलिक विचारधाराएँ   फ्रांस में भौगोलिक चिंतन का विकास फ्रांस में भौगोलिक चिंतन के प्रति सचेत होने का कारण- फ्रैको - प्रशन युद्ध में फ्रांस की पराजय हुई युद्ध के बाद यह अनुभव किया जाने लगा कि विश्व के भिन्न-भिन्न भागों में भौगोलिक परिवेश तथा जीवन-पद्धति का समुचित ज्ञान जरुरी है। विश्व विद्यालय स्तर पर भूगोल का अध्ययन अनिवार्य हो गया था। फ्रांस के भौगोलिक विकास मे पेरिस में स्थित सोसायटी दी ज्योग्राफी का अहम योगदान है। अंतर्राष्ट्रीय भौगोलिक काग्रेस ने फ्रांस के भौगोलिक विकास में मुख्य भूमिका निभाई। (1) विडाल डी ला ब्लास (Vidal de la Blache 1845-1918) फ्रांस के आधुनिक भौगोलिक चिंतन के विकास में ब्लास की केंद्रीय महत्ता थी। फ्रांस में मानव केंद्रित आधुनिक चिंतन की नीव रखी। 1866 में पेरिस के इकोल नॉर्मल सुपीरियर सस्थान से ग्रेजुएट किया। तथा 1872 में यहाँ से डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण की। 1898 में पेरिस विश्वविद्यालय में मानव अध्ययन के विश्व प्रसिद्ध संस्थान सारबोन में भूगोल के आचार्य के रुप में कार्य किया। रेटजैल के ए...

अरब भूगोलवेत्ता Arab Geographers

                       अरब भूगोलवेत्ता (1) इब्न हाकल (943-973 ईस्वी) प्रमुख पुस्तक    1. A Book of Routs and Reams     2. पृथ्वी की आकृति (Shape of the Earth)    3. संसार के देश (Countries of the world) इब्न हाकल ने यूरोप महाद्वीप को एक द्वीप माना। कैस्पियन सागर व उत्तरी सागर का वर्णन किया। 2. इब्न सीना अरब भूगोल का जनक पिता इब्न सीना ने एक विश्वकोष बनाया जिसमें भौतिक भूगोल (पर्वत, मृद्रा, निर्माण) का वर्णन किया। 3. अलमसूदी (890 - 956 ईस्वी) अरब का हेरोडोट्स प्रमुख पुस्तक    1. समय विवरणिका (Annals of times)    2. सोने के चारागाहे एवं जवाहरातों की खानें      (Meadows of Gold and mines of Precious stones)    3. उपदेश और निरीक्षण(Exhortation and Inspection) मसूदी ने कैस्पियन सागर को बंद सागर बताया। सर्वप्रथम नदियों को अपरदन का सबसे महत्वपूर्ण कारक माना। मसूदी एक जलवायु वैज्ञानिक था। मसूदी नियतिवादी विचारक थां म...

आधुनिक भूगोल का शास्त्रीय काल

                                        आधुनिक भूगोल का शास्त्रीय काल आधुनिक भूगोल के विकास के नीव हम्बोलट व रिटर ने रखी अत इनको आधुनिक भूगोल का संस्थापक कहा जाता है।  इस काल में अनेक भूगोलवेत्ताओं का उदय हुआ। लेकिन मुख्य रुप से तीन भूगोलवेत्ताओं का योगदान उल्लेखनीय रखा है।  भौगोलिक विचारधाओं का विकास (1) अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोलट (Alexander von Humboldt 1769-1859) इनका संबध प्रशिया (जर्मनी) से था। क्रमबद्ध भूगोल लिखा। सर्वप्रथम कालमापी का प्रयोग किया हम्बोलट के ग्रंथ-           1. राईनलैड बेसाल्ट 1789           2. प्रकुति दिग्दर्शन  (Views of Nature)1847           3. मध्य एशिया (Asia Cntrale)  में लिखी यह दो खंडों में 1829           4. कॉसमॉस (Kosmos) 5 खंडों में           5. भूमध्य रेखीय प्रदेशों का वर्णन 1815-1820 इसमें दो पुस...

भौगोलिक विचारधाओं का विकास

                                  भौगोलिक विचारधाओं का विकास  भूगोल विषय से संबधित इस ब्लॉक में भौगोलिक विचारधारों का विकास से संबधित महत्वपूर्ण नोट्स तैयार किये गये है जो युजीसी नेट तथा राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कि जाने वाली विभिन्न एग्जाम हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकतें है। इस ब्लॉक में भूगोल की उत्पत्ति से लेकर रोमन काल तक के नोट्स  उपलब्ध करवाये जा रहें है। बाकी के बचे हुए नोट्स इसी तरह अलग अलग भागों में जल्द ही उपलब्ध करवा दिये जायेगे।    link  आधुनिक भूगोल का शास्त्रीय काल     भूगोल की परिभाषा-     भूगोल शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग इरेटास्थेनीज एक ग्रीक विद्वान (276-194 ई. पू.) ने किया।     यह शब्द ग्रीक भाषा के दो मूल शब्द Geo (पृथ्वी) एंव graphos (वर्णन) से प्राप्त किया गया है दोनों को एक        साथ रखने पर इसका अर्थ बनता है, पृथ्वी का वर्णन है।               ...

एफडीआई क्या है what is FDI

आज दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसके एजेंडे में एफडीआई अर्थात् प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( Foreign Direct Investment FDI)   का जिक्र न हो, इसका सीधा मतलब यही है की जिस देश में जितना ज्यादा विदेशी निवेश होता है उस देश की आर्थिक विकास दर को उतनी ही गति  मिलेगी, क्योकि इसमें पुॅजी का प्रवाह बड़े स्तर पर होता है जिससे विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है, रोजगार के नये अवसर प्राप्त होते है नवीन टेक्नोलॉजी के आने से तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में वृद्धि होती है। अब हम विस्तार से एफडीआई के बारे मे निम्न बिंदुओ के माध्यम से समझने का प्रयास करते है-एफडीआई क्या है, एफडीआई के लाभ, एफडीआई केनुकसान, एफडीआई की राह में प्रमुख बाधाऐ आदि के बारे में चर्चा करेगे।          FDI क्या है। जब कोई व्यक्ति या कंपनी किसी दुसरे देश में अपनी पुॅजी निवेश करती है तो इसे एफडीआई अर्थात् प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( Foreign Direct Investment FDI)  कहा जाता है। इसकी एक सामान्य शर्त आईएमएफ (IMF)  के अनुसार यह है की  व्यक्ति या कंपनी को किसी द...

आर्थिक मंदी

जैसा कि हम सभी जानते है देश में आर्थिक मंदी के बारे में चर्चाएं जोरो पर है, समाचार पत्र पत्रिकाओं आदि में आर्थिक मंदी के बारे में बाते सुनने को मिल रही है। हम इस ब्लॉक के जरिये इसी आर्थिक मंदी के बारे विस्तार से चर्चा करेगे। इसका अध्ययन हम बिंदुवार करेगे। आर्थिक सुस्ती- जब GDP  मांग, व रोजगार निरंतर घट रहे हो तो यह आर्थिक सुस्ती कहलाती है। इसके अधिक गहराने पर यह आर्थिक मंदी में तब्दील हो जाती है, जब यही आर्थिक मंदी और ज्यादा बिगड़ जाये तो इसे महा आर्थिक मंदी कहा जाता है।  अर्थिक मंदी के बाद किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादन व रोजगार निरंतर बढ़ रहे हो तो, अर्थव्यस्था सुधार के चरणों में होती है। जब किसी अर्थव्यवस्था में मांग घटने लगती है, तो उत्पादन सहित किमते घटने लगती है, तथा मुद्रास्पीति निचे की और गिर जाती है बेरोजगारी बढ़ जाती है, यह आर्थिक सुस्ती होती है, और यही हालात आर्थिक मंदी कि और इसारा करती है। आर्थिक मंदी (economic slowdown)  यदि किसी अर्थव्यवस्था की आर्थिक विकास दर दो तिमाही तक ऋणात्मक आर्थिक विकास दर रहती है, तो यह आर्थिक मंदी कहलाती है। आर्थिक म...